वैश्विक ब्रोकरेज बर्नस्टीन की एक कड़ी चेतावनी ने इस सप्ताह भारत में रोज़गार की बहस को फिर सुर्ख़ियों में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक खुले पत्र में बर्नस्टीन के विश्लेषकों वेणुगोपाल गर्रे और निखिल अरेला ने आगाह किया कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वचालन से भारत के आईटी और बीपीओ क्षेत्रों में 1 से 1.5 करोड़ नौकरियाँ ख़तरे में पड़ सकती हैं, जबकि विनिर्माण क्षेत्र विस्थापित कामगारों को उतनी तेज़ी से खपा नहीं पा रहा।
पत्र का तर्क है कि पिछले दो दशकों में भारत के शहरी मध्यवर्ग को ऊपर उठाने वाली नौकरियों का एक बड़ा हिस्सा अब सीधे स्वचालन की चपेट में है — रूटीन कोडिंग और टेस्टिंग से लेकर बैक-ऑफ़िस सहायता जैसे कामों तक, जिन्हें बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) तेज़ी से संभालने लगे हैं।
भर्ती के आँकड़े भी इस चिंता की पुष्टि करते दिखते हैं: भारत की शीर्ष पाँच आईटी कंपनियों में शुद्ध कर्मचारी वृद्धि में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर कौशल-उन्नयन और नए क्षेत्रों में रोज़गार सृजन ज़रूरी है।
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