नीट-यूजी 2026 मेडिकल प्रवेश परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र विरोध प्रदर्शन अब सातवें सप्ताह में पहुंच गए हैं। इस सप्ताह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई।
संकट की शुरुआत कैसे हुई
3 मई को करीब 22.7 लाख अभ्यर्थियों के साथ नीट-यूजी 2026 परीक्षा आयोजित हुई थी। पहले से लीक हुए एक ‘गेस पेपर’ और असली प्रश्नपत्र के बीच समानताएं पाए जाने के बाद 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा रद्द कर दी। इससे वर्षों तैयारी कर चुके छात्रों और परिवारों में गहरा आक्रोश फैल गया।
एक अपमानजनक टिप्पणी से आंदोलन तक
बेरोजगार युवाओं को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की ‘कॉकरोच’ और ‘समाज के परजीवी’ जैसी टिप्पणी के बाद, 16 मई को पूर्व आप रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने सीजेपी की स्थापना की। 6 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुए प्रदर्शन अब मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, शिमला और त्रिशूर जैसे शहरों तक फैल चुके हैं।
20-21 जुलाई को संसद की ओर बढ़े ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया गया है। इस आंदोलन के साथ दुखद घटनाएं भी जुड़ी हैं — परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव के चलते देहरादून की 23 वर्षीय छात्रा सहित कई नीट अभ्यर्थियों ने आत्महत्या कर ली। (मानसिक तनाव में किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन किरण: 1800-599-0019 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है।)
मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी की मुख्य मांग है। इसके अलावा पारदर्शी जांच, एनटीए को भंग करने और प्रभावित परिवारों को मुआवजे की भी मांग की जा रही है। सरकार का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी खामियां प्रशासनिक रूप से सुलझाई जा चुकी हैं और इस्तीफे की मांग राजनीतिक है, हालांकि छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने पर सहमति के संकेत दिए हैं। प्रकाशन तक किसी समाधान की घोषणा नहीं हुई थी।
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